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Book Review : दुनिया भर के आदिवासियों को श्रद्धांजलि है नीलाक्षी फुकन की ‘नेटिव अमेरिका की लोक कथाएं’

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मानवीय विचित्रता के बोध को समझने व यथोचित सम्मान प्रदान करने के लिए लोक कथाओं का आज भी अत्यंत महत्त्व है. लोक कथाएं सालों-साल से ज्ञान और मनोरंजन का स्त्रोत बनकर आज भी ज़िंदा हैं और आने वाले कई सालों तक इसी तरह जीवंत रहेंगी. बात चाहे बच्चों के संज्ञात्मक विकास की हो, आत्मविश्वास को बढ़ाने की हो, स्वतंत्र पहचाने बनाने की हो या फिर मानव की परंपरागत जीवन-शैली के विकास की हो, लोक कथाओं ने अपनी मौजूदगी हर रूप में दर्ज की है. बच्चों की कल्पना शक्ति को विकसित करने के साथ-साथ ये कहानियां जादुई दुनिया की खोज कराने व परियों के साथ सैर करने का भरपूर मौका देती हैं.

लोक कथाएं लोक साहित्य की अन्य विधाओं की तरह लोक जीवन के स्वत:स्फूर्त स्वाभाविक उद्गार हैं. अगर एक जाति व समाज विशेष के संपूर्ण रीति-रिवाज़, आचार-विचार, आस्थाओं, मान्यताओं और जीवन पद्धति को करीब से जानना-समझना है, तो वहां की लोक कथाओं से बेहतर कोई नहीं समझा सकता. गौरतलब है, कि लोक कथाएं लोकजीवन के प्रत्येक पक्ष को स्पर्श करती हुई लोक की संवेदनाओं, सुख-दुख, आशा-निराशा, धार्मिक-सांस्कृतिक और पौराणिक विश्वासों को एक जगह सहेजने का काम करती हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह डॉ. नीलाक्षी फुकन ने अपनी पुस्तक ‘नेटिव अमेरिका की लोक कथाएं’ में करने का काम किया है.

डॉ. फुकन अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट टीचिंग प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है और हिंदी-उर्दू के भाषा-साहित्य के साथ-साथ दक्षिण एशियाई साहित्य-संस्कृति का शिक्षण कार्य कर रही हैं. गौरतलब है, कि डॉ. फुकन ने भाषा-साहित्य की शिक्षण प्रणाली में आधुनिक टेकनॉलोजी का इस्तेमाल कर कई प्रौद्योगिकी-संबंधित परियोजनाओं को भी डिजाइन किया है. साथ ही हिंदी से असमिया भाषा में अनुवादित पुस्तकें ‘कुन खन आपुन भूमि?’ और ‘शिशुर श्रेष्ठ गल्प’ भी लिखी है. डॉ. फुकन असमिया भाषा से अंग्रेज़ी में अनुवादित पुस्तक ग्रैंडमदर टेल्स की संपादिका भी रही हैं और इन दिनों नॉर्थ कौरोलिना के मारीसबिल शहर में रहती हैं.

अपनी पुस्तक ‘नेटिव अमेरिका की लोक कथाएं’ के बारे में डॉ. फुकन कहती हैं, “इस पुस्तक में शामिल की गई लोक कथाओं को चुनते समय मैंने कई विषयों पर विशेष रूप से ध्यान दिया है. पहली बात इस पुस्तक के मुख्य उद्देश्य के साथ जुड़ी हुई है, जो नेटिव अमेरिका के मूल निवासियों यानी यहां के आदिवासियों की लोक-संसकृतियों, लोक-परंपराओं, रीति-रिवाज़ों, जीवन-शैलियों, मान्यताओं और जीवन-दर्शन को सम्मानपूर्वक उपस्थापन कर उनसे हिंदी-उर्दू के पाठकों के साथ-साथ दक्षिण एशियाई पाठकों को अवगत कराना है.”

‘नेटिव अमेरिका की लोक कथाएं’ पुस्तक में संग्रहित सारी लोक कथाएं अमेरिका के नेटिव अमेरिका यानी आदिवासियों की जीवन-शैली पर आधारित कथाएं हैं, जिनका चुनाव विशिष्ट संरचनात्मक शैलियों पर ध्यान केंद्रित करके किया गया है. इस संग्रह में कुल 14 कहानियां हैं, जिनमें अमेरिका के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों को ध्यान में रखकर वहां की संस्कृति व आदिवासियों के अस्तित्व को पेश करने का काम किया गया है. ऐतिहासिक तौर पर भी यह संग्रह बेहतरीन है, जिसे पढ़ते हुए कई तरह की संस्कृतियों और सच्चाइयों से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है. किताब में ऐसी कई जानकारियां हैं, जिनके बारे में शायद कभी कहीं नहीं लिखा गया और न लोक कथाओं से जोड़कर किसी ने इस ओर ध्यान खींचने की कोशिश की. ये संग्रह सिर्फ कहानियों का ही नहीं है बल्कि कि लेखिका की सफल और सार्थ रिसर्च भी है, जो इसे पढ़ने के बाद समझ आती है.

पुस्तक : नेटिव अमेरिका की लोक कथाएं (कहानी-संग्रह)
लेखक : नीलाक्षी फुकन
प्रकाशक : वाणी प्रकाशन
मूल्य : 399 रुपए

Tags: Book, Books, Hindi Literature, Hindi Writer, Literature, New books

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देश के एक साधारण श्रमिक के बेटे राम गोपाल की जिस निर्ममता से पिटाई कर हत्या कर दी गई और गोली मार दी गई, वह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली थी। आज न्यायपालिका द्वारा दोषियों को कठोर दंड सुनाया जाना, देश के सभी श्रमिक भाइयों के लिए और विशेषकर राम गोपाल के परिवार के लिए एक सच्ची श्रद्धांजलि है।

श्याम महोत्सव में भजनों की गूंज से गूंजा पूरा तीर्थ भरावन। कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली के पावन अवसर पर शुक्रवार की शाम श्री नारायण सरोवर तीर्थ, बनी में दो दिवसीय कार्तिक मेले में द्वितीय माँ भगवती जागरण एवं श्याम महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।

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